Wednesday, June 2, 2010

बेखबर

तेरे मासूम से चेहरे पर
बंद पलकों के पीछे छिपे दो नयन
कुछ हलकी शाम की गहराई लिए
मानो कर रही थी किसी का इंतज़ार

सामने बैठी सभी की निगाहे
तलाश रही थी तुम्हारे चेहरे को
और आस पास से बिलकुल बेखबर
न जाने कहाँ खोई थी तुम

तुम्हारे बगल में बैठा
बेताब था मै, तुम्हे जानने को, पाने को
क्योंकि मुझे भी तलाश है किसी की
लगा मंजिल के पास बैठा हूँ
पर ज्यों ही कदम बढ़ाये थे लपकने को
तुम उठकर चल पड़ी थी
शायद अपने इंतज़ार से उब कर
- मधुरेश, अगस्त 2000

एक शाम की मौत का इंतज़ार

एक शाम की मौत का इंतज़ार
किया था उस पीपल के नीचे
जब तुम दूर उसकी बाँहों में
झूल रही थी
तिनका तिनका जोड़, तुम्हारी यादों का
एक सपनो का घर ही तो बनाया था
इस शाम की मौत और उसका संताप मानाने
हर कोई आया था
आई नहीं तो सिर्फ तुम, सिर्फ तुम .
- मधुरेश, 2000

तलाश

तलाश
मुझे अहसास है
तुम्हारी गर्म सांसो से भरे चेहरे को
अपने हाथों में ले
धीरे से उठाया था मैंने
तुम्हारी लाल-लाल आँखों में
देखी थी अपने आँखों की परछाई
कुछ पल यूँ ही डूबा रहा था
तुम्हारे आँखों की लाली में
अचानक ही ख्याल आया
वह कोने में खड़ा वेटर
काफी देर से हमें ही तो 
देख रहा था
हडबडाकर, तुम्हारे मोती से
आसूँ की दो बूँद सहेजे
मैं चल पड़ा था
किसी और की तलाश में
- मधुरेश, पुणे, १३ जून २०००

किसकी नदियाँ किसके जंगल

किसकी नदियाँ किसके जंगल
बोलो किसके हैं ये पहाड़
क्या खाक मिली है आज़ादी
जब सब कुछ ही लेले सरकार

प्रजातंत्र के नाम पे
प्रजा का काटते हैं गला
अपनी ज़मीन छोड़ के भागो भैया 
देश का होगा भला

छोड़ के आओ जंगल मिलेगा
slum का उपहार
इसी को कहते हैं प्रगति
सुन के दिल खुश हुआ, यार

खेती बाड़ी को डुबो के
तुम सभ्यता को उबारोगे
जीवनदान के नाम पे आखिर
कितनो को तुम मारोगे ?

इतिहास चीख गवाही देगा
बाँध करेगा सत्यानाश .

- Ralley for the Valley, August 1999 के दौरान आनदं, अमित, गगन, मितुल और मधुरेश के द्वारा 

तुम्हारे लिए

तुम्हारे लिए
एक ख़त
और एक ख़त में छुपी ढेर सारी बातें
बातें पूरी दुनिया की
आज की, कल की और परसों की
तुम्हारे लिए
ख़त में छिपे प्रत्येक अक्षर
और उन अक्षरों का रूप, साज़ और श्रृंगार
अक्षरों से आती मेरे दिल की पुकार
उनमे छिपा मेरे भावों का संसार
सब तुम्हारे लिए
और क्या ?
दादा-दादी की कहानियां, इंडिया गेट की सैर
पंडित जी की बांसुरी और सितार
अमृतसर का स्वर्ण मंदिर, साथ में फिल्मे
सब कुछ तो तुम्हारे लिए
पर मेरे लिए
सिर्फ यादें, यादें और ढेर सारी यादें
- मधुरेश, मई 1999

इंतज़ार

इंतज़ार है मुझे इस पल का
जब हम साथ होंगे
मुझे इंतज़ार है रजनीगंधा के फूलों का
रात की उस घडी का
जब तुम्हारी सुन्दरता और निखरती है
लोग कहते हैं तुम रात की रानी हो
नहीं तुम तो खुद रात हो, रजनी हो
क्या वह रात फिर आएगी
एक सवेरे के साथ शायद
और एक बार फिर
हम साथ साथ होंगे .
- मधुरेश, फेब्रुअरी 1999

मेरा घर जल गया

मेरा घर जल गया
मैं रोया चिल्लाया, लोगों को बताया
लोगों ने सुना, सहानुभूति दिखाई
घर गए और सो गए
चलो अपना घर तो नहीं जला
अब मुझे इंतज़ार है
कब दुसरे का घर जले
और मैं भी खुशियाँ मनाऊँ
- मधुरेश, फेब्रुअरी 1999